Monday, June 17, 2013

छत्तीसगढ़ में 63 पुलिसवालों की हत्या

0 कुल 72 पुलिस वालों ने ड्यूटी के दौरान गंवाई जान                    
0 37 नक्सलियों के निशाने पर आकर शहीद हुए
0 नौ अधिकारी और कर्मचारी हुए एक्सीडेंट का शिकार
0 मौत के छह में से पांच कारणों में छत्तीसगढ़ पहले नम्बर पर
छत्तीसगढ़ के 72 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने पिछले साल (वर्ष 2012) ड्यूटी के दौरान अलग-अलग कारणों से अपनी जान गंवाई। पुलिस वालों की मौत के आंकड़ों में छत्तीसगढ़ देशभर में तीसरे नम्बर का राज्य है। लेकिन मौत के छह में से पांच कारण ऐसे हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ पुलिस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। ये पांचों कारण हत्या से जुड़े हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वार्षिक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। ब्यूरो ने पुलिस वालों की मौत के कारणों को छह वर्गों में बांटा है। इसमें नक्सल या आतंकी हमला, डकैती ऑपरेशन या अन्य छापे, बलवाइयों का हमला, अन्य अपराधियों द्वारा हत्या, बॉर्डर ड्यूटी के दौरान और एक्सीडेंट शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार एक्सीडेंट में पिछले साल छत्तीसगढ़ पुलिस के नौ अधिकारियों और कर्मचारियों की मौत हो हुई, जबकि 63 पुलिस वालों को किसी न किसी ने मौत के घाट उतार दिया।
उत्तरप्रदेश पुलिस को भारी क्षति
मौत के सभी कारणों को मिलाकर पुलिस वालों के नुकसान के आंकड़े को देखा जाए तो उत्तरप्रदेश पुलिस को सबसे ज्यादा क्षति हुई है। इस प्रदेश के 110 पुलिस वालों की मौत ड्यूटी के दौरान हुई। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को अपने 83 कर्मचारियों की मौत का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, तीसरे नम्बर पर छत्तीसगढ़, गुजरात और पंजाब पुलिस के 72-72 अधिकारी-कर्मचारियों की मौत के आंकड़े हैं।
छत्तीसगढ़ पुलिस का नुकसान
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नक्सलियों ने 37 की हत्या
नक्सली या आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ पुलिस के 37 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शहीद हुए। यह आंकड़ा देश के बाकी 27 राज्य और सात केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में सबसे ज्यादा है। दूसरे नम्बर पर महाराष्ट्र में 14 और तीसरे नम्बर पर ओडिश्ाा में 13 पुलिस वालों की जान नक्सली या आतंकी हमले में गई।
0 ऑपरेशन में नुकसान
पिछले साल डकैत ऑपरेशन या अन्य छापे के दौरान यहां एक पुलिस कर्मी की मौत हुई थी। झारखंड पुलिस को भी नुकसान का यही आंकड़ा है। जबकि, बाकी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस  को ऐसे ऑपरेशन या छापे में कोई भी नुकसान नहीं उठाना पड़ा।
 बलवाइयों ने नौ को मारा
वर्ष 2012 में बलवा के दौरान कई बार छत्तीसगढ़ पुलिस को हमले झेलने पड़े। बलवाइयों ने नौ पुलिस वालों की जान भी ले ली। इसमें भी छत्तीसगढ़ पुलिस को ही सबसे ज्यादा क्षति हुई। इस तरह की क्षति कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु पुलिस को भी उठानी पड़ी, जहां एक-एक पुलिस कर्मी बलवाइयों के शिकार हुए।
0 अन्य अपराधियों के शिकार
छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारी और कर्मचारियों की हत्या अन्य अपराधियों के हाथों भी हुई है। दर्जनभर पुलिस वालों को लुटेरों, डकैतों या अन्य अपराधियों ने मौत के घाट उतार दिया। राजस्थान में भी इतने ही पुलिस वाले अन्य अपराधियों के शिकार हुए। जबकि, उत्तरप्रदेश में 11 पुलिस वालों को ऐसे अपराधियों ने मारा।
बॉर्डर ड्यूटी में गई जान
छत्तीसगढ़ की सीमा पर ड्यूटी के दौरान भी पुलिस वालों की जान गई है। उन्हें भी नक्सलियों ने मारा या फिर किसी अन्य अपराधी। पिछले साल चार पुलिस वाले ऐसे थे, जो बॉर्डर ड्यूटी के दौरान मारे गए। देशभर में सीमा पर पुलिस वालों की मौत का यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है।
 एक्सीडेंट में 16वां राज्य
एक्सीडेंट में पुलिस वालों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ 16वें नम्बर पर रहा। एक्सीडेंट में 99 पुलिस वालों की मौत होने पर उत्तरप्रदेश पुलिस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। जबकि, गुजरात में 71 और महाराष्ट्र में 64 पुलिस वाले एक्सीडेंट का शिकार हुए।

 

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