Tuesday, May 28, 2013

माओवादियों की मांद में माफिया राज...

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की सड़कों पर सन्नाटा पसरना शुरू हो गया है. जंगलों और पहाड़ों के बीच से होकर गुजरने वाली सडकें वीरान होती चली जा रहीं हैं. मगर इस खामोशी को चीरते हुए कुछ वाहन अंधेरे में गाँव की तरफ जा रहे हैं. जंगलों और पहाड़ों के बीच से होकर गुजरने वाली सडकें वीरान होती चली जा रहीं हैं. मगर इस खामोशी को चीरते हुए कुछ वाहन अंधेरे में गाँव की तरफ जा रहे हैं. वो कैसे वाहन हैं? इनमे से कुछ वाहन बड़े ट्रक हैं और इनके आगे-आगे छोटे वाहन में कुछ हथियारबंद लोग सवार हैं. दंतेवाड़ा की दहशत भरी वादियों में वो हथियारबंद लोग माओवादी नहीं हैं. उनके पास यहाँ के वीरानों में घूमने के लिए एक तरह का अघोषित लाइसेंस है. कुछ ही देर में इन वाहनों में सवार लोग एक दूसरे से भीड़ जाते हैं. एक दूसरे पर संगीनें तन जाती हैं. यहाँ एक नए संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. यह लौह अयस्क की तस्करी में शामिल गुटों के बीच वर्चस्व का संघर्ष है.
खनन एनएमडीसी के हाथ
दंतेवाड़ा की धरती लोहा उगलती है क्योंकि यहाँ लौह अयस्क का प्रचुर भण्डार हैं. वैसे यहाँ लौह अयस्क के खनन का ज़िम्मा सरकारी उपक्रम 'नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरशन' (एनएमडीसी) को दिया गया है. एनएमडीसी सीमित इलाके में ही खनन करती है जबकि वहां का पूरा इलाका लौह अयस्क से भरा हुआ है. चूँकि यह इलाका गावों और जंगलों का है, यहाँ एनएमडीसी खनन नहीं कर रही है और यह पूरा खजाना हथियारबंद गुटों के हवाले हो गया है जो रात के अंधेरे में ट्रकों के माध्यम से इसे देश के दूसरे स्थानों पर बेच रहे हैं.
बच गए विधायक
दंतेवाड़ा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भीमा मंडावी नें तस्करी करके ले जा रहे लौह अयस्क के ट्रकों को पकड़ा तो उनपर संगीनें तान दी गई. इसको लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलके में काफी हलचल मच गयी है क्योंकि मांडवी सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं. मांडवी नें बीबीसी से बात करते हुए अपने उपर जानलेवा हमले की आशंका व्यक्त की है. उन्होंने कहा, "जिस पैमाने पर दंतेवाड़ा से लौह अयस्क की तस्करी हो रही है मेरे उपर किसी भी दिन जानलेवा हमला हो सकता है." मांडवी ने यही शिकायत सरकार से भी की है.
बैलाडीला की पहाड़ियों के नीचे बसा है कामेली गांव. कुछ दिनों पहले यहाँ के लोगों नें लौह अयस्क के तस्करों से लोहा लिया. अमूमन गाँव के लोग जल्द ही सो जाते हैं मगर उस दिन किसी काम से शहर गए गाँव के सरपंच सुरेश कुमार तमना को घर लौटने में देर हो गयी. देर रात उन्होंने देखा कि उनके गॉव में ट्रक लगाकर कुछ लोग उसपर खेतों में पड़ा लौह अयस्क को ट्रक पर भर रहे हैं. तमना नें गाँव वालों के साथ मिलकर तस्करों को चुनौती दी और पुलिस को इसकी सूचना दी. दंतेवाड़ा में एकमात्र होटल मधुबन के मालिक भानुप्रताप चौहान नें भी सार्वजनिक रूप से आशंका व्यक्त की है कि उनकी जान को भी लौह अयस्क के तस्करों से खतरा है.
अलग-अलग गुट
वहीं दंतेवाड़ा के रहने वाले भाजपा के प्रमुख नेता और राज्य पर्यटन मंडल के उपाध्यक्ष अजय तिवारी नें आरोप लगाया है कि कुछ स्थानीय अधिकारियों और पुलिस वालों नें तस्करी के अपने-अलग अलग गुट बना लिए हैं.
इस मामले पर नज़र रख रहे दंतेवाड़ा से प्रकाशित अखबार 'बस्तर इम्पैक्ट' के सम्पादक सुरेश महापात्र नें भी आशंका जताई कि अगर समय रहते लौह अयस्क की तस्करी पर रोक नहीं लगाई गयी तो जल्द ही दंतेवाड़ा की भूमि पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार के शूटरों जैसे संघर्ष का केंद्र बन जायेगी.
अवैध खनन इतना अधिक है कि सभी परेशान हैं
मेरे साथ बैलाडीला के पहाड़ों के तिलहट्टी के इलाके में मौजूद सुरेश महापात्र का कहना था, "यहाँ के इलाके में लोहे की फसल होती है खेतों में. इस इलाके में एनएमडीसी खनन नहीं करता. इसी का फायदा माफिया उठा रहा है. सरकार को चाहिए कि वह खुद इन खेतों से लौह अयस्क खरीदे जिससे यहाँ के ग्रामीणों को भी फायदा होगा और तस्करी भी रुकेगी."
लौह अयस्क की तस्करी में अब कई बड़े गुट शामिल हो गए हैं जो दंतेवाड़ा से माल भेजकर बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. इस खेल में कुछ सरकारी अधिकारियों और पुलिसवालों के शामिल होने की बात भी अब उजागर हो चुकी है.
दंतेवाड़ा के बचेली में ही सातधन पुल के पास खनिज विभाग का नाका हुआ करता था. मगर लौह अयस्क के तस्कर वहां तैनात विभाग के कर्मचारियों को डराया धमकाया करते थे. नौबत यहाँ तक आ पहुंची कि विभाग के कर्मचारियों को नाका छोड़कर भाग जाना पड़ा. अब जिला प्रशासन नें भांसी थाने के सामने नया नाका बनाया है.
माओवादियों से साँठ-गाँठ
यह इलाका माओवादियों का गढ़ माना जाता है जहाँ कोई बिना उनकी मर्ज़ी से आ-जा नहीं सकता. यह वही इलाका है जहाँ माओवादियों नें कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया हैं. इस इलाके में सुरक्षा बल के जवान और अधिकारी असुरक्षित हैं तो ऐसे में आधी रात में इस इलाके से लौह अयस्क की तस्करी कई आशंकाओं को जन्म देती है.
कुछ लोगों का कहना है कि बिना माओवादियों के संरक्षण के इस इलाके में पत्ता भी नहीं हिल सकता. इसलिए बिना उनकी जानकारी के लौह अयस्क का बाहर जाना असंभव लगता है.
सरकारी दस्ते का गठन
दंतेवाड़ा के कलक्टर ओपी चौधरी का कहते हैं, "जिला प्रशासन ने लौह अयस्क के तस्करों पर शिकंजा कसने का काम शुरू कर दिया है. "अनुमंडल अधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों के एक दल का गठन किया गया है. इस दल में वन और खनिज विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है."
वह कहते हैं, "यह मामला गंभीर है क्योंकि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कई गुट लौह अयस्क की तस्करी में सक्रिय हैं, हमने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. हाल ही में हमने भांसी थाने के सामने एक नाका भी बनाया है और तस्करी को रोकने के लिए एक उड़न दस्ते का गठन भी किया है. जो भी गुट इस धंधे में शामिल हैं, उनपर करवाई शुरू कर दी गयी है.हालांकि माओवादियों ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की है लेकिन कई ऐसे उदाहरण मिले हैं जब तस्करों नें माओवादियों का डर दिखाकर गांववालों या खनिज विभाग के लोगों को डराने का काम किया है.
"अनुमंडल अधिकारी के नेतृत्व में प्रशानिक अधिकारियों के एक दल का गठन किया गया है. इस दल में वन और खनिज विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है. "
दंतेवाड़ा के कलक्टर ओ पी चौधरी
"यहाँ इस इलाके में लोहे की फसल होती है खेतों में. इस इलाके में एनएमडीसी खनन नहीं करता. इसी का फायदा माफिया उठा रहा है. सरकार को चाहिए कि वह खुद इन खेतों से लौह अयस्क खरीदे जिससे यहाँ के ग्रामीणों को भी फायदा होगा और तस्करी रुकेगी"
स्थानीय अखबार 'बस्तर इम्पेक्ट' के सम्पादक सुरेश महापात्र
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जिस पैमाने पर दंतेवाड़ा से लौह अयस्क की तस्करी हो रही है मेरे उपर किसी भी दिन जानलेवा हमला हो सकता है"
दंतेवाड़ा से भाजपा के विधायक भीमा मंडावी
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छत्तीसगढ़ में निर्दोषों की हत्या पर खेद: माओवादी
पार्टी (माओवादी) ने कहा है कि 'दमन की नीतियों' को लागू करने में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की समान भागीदारी है और इसलिए संगठन ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को क्लिक करें निशाने पर लिया है.सोमवार देर शाम बीबीसी को भेजी गई एक विज्ञप्ति और एक रिकॉर्ड किए गए बयान में दंडकारण्य विशेष ज़ोनल कमिटी के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी का कहना है कि राज्य के गृहमंत्री रह चुके छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल जनता पर ‘दमनचक्र चलाने में आगे रहे थे, उसेंडी का कहना है कि पटेल के समय में ही बस्तर क्षेत्र में पहली बार अर्ध-सैनिक बलों की तैनाती की गई थी. बयान में उसेंडी ने कहा, “ये भी किसी से छिपी हुई बात नहीं कि लम्बे समय तक केन्द्रीय मंत्रिमंडल में रहकर गृह विभाग समेत विभिन्न अहम मंत्रालयों को संभालने वाले वीसी शुक्ल भी जनता के दुश्मन हैं, जिन्होंने साम्राज्यवादियों, दलाल पूंजीपति और ज़मींदारों के वफादार प्रतिनिधि के रूप में शोषणकारी नीतियों को बनाने और लागू करने में सक्रिय भागीदारी की, शनिवार को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर बड़ा नक्सली हमला हुआ था जिसमें प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार और वरिष्ठ नेता क्लिक करें महेंद्र कर्मा समेत 24 लोगों की मौत हो गई थी. हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए संगठन ने कहा है कि आदिवासी नेता कहलाने वाले महेन्द्र कर्मा का ताल्लुक ‘एक सामंती मांझी परिवार’ से रहा. इस हमले की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कड़े शब्दों में निंदा की थी.माओवादियों का आरोप है कि कर्मा का परिवार ‘भूस्वामी होने के साथ-साथ आदिवासियों का अमानवीय शोषक व उत्पीड़क’ रहा है. उसेंडी नें कहा, “1996 मे बस्तर में छठवीं अनुसूची लागू करने की मांग से एक बड़ा आंदोलन चला था. हालांकि उस आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से भाकपा ने किया था, लेकिन उस समय की हमारी पार्टी भाकपा (माले) (पीपल्स वार) ने भी उसमें सक्रिय रूप से भाग लेकर जनता को बड़े पैमाने पर गोलबंद किया था.संगठन का आरोप है कि महेन्द्र कर्मा ने उस आंदोलन का विरोध किया था.माओवादियों के बयान में कहा गया है कि 'छत्तीसगढ़ के मुंख्यमंत्री रमन सिंह और महेन्द्र कर्मा के बीच कितना अच्छा तालमेल रहा, इसे समझने के लिए एक तथ्य काफी है - कि मीडिया में कर्मा को रमन मंत्रिमंडल का सोलहवां मंत्री कहा जाने लगा था.सलवा जुडूम की चर्चा करते हुए उसेंडी का कहना था,"बस्तर में जो तबाही मचाई गई और जो क्रूरता बरती गई, उसकी तुलना में इतिहास में बहुत कम उदाहरण मिलेंगे.माओवादियों ने सलवा जुडूम के सदस्यों पर बलात्करा व दूसरे अत्याचारों का आरोप लगाया है, वे कहते हैं, “कुल एक हजार से ज्यादा लोगों की हत्या कर, 640 गांवों को कब्रगाह में तब्दील कर, हजारों घरों को लूट कर, मुर्गों, बकरों, सुअरों आदि को खाकर और दो लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित कर, 50 हजार से ज्यादा लोगों को बलपूर्वक राहत शिविरों में घसीटकर सलवा जुडूम जनता के लिए अभिशाप बना था. विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि सलवा जुडूम के दौरान सैकड़ों महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया.माओवादियों नें दावा किया है कि इस कार्रवाई के जरिए उन्होंने ‘एक हजार से ज्यादा आदिवासियों की ओर से बदला ले लिया है जिनकी सलवा जुडूम के गुण्डों और सरकारी सशस्त्र बलों के हाथों हत्या हुई थी.’ माओवादियों का कहना है कि इस हमले का लक्ष्य मुख्य रूप से महेन्द्र कर्मा तथा ‘कुछ अन्य कांग्रेस नेताओं का खात्मा करना था.’खेद, मगर कांग्रेस के काफिले पर हुए हमले में कई निर्दोष लोगों की भी हत्या हुई जैसे वाहनों के ड्राइवर, खलासी और कांग्रेस के निचले स्तर के नेता.माओवादियों ने इन लोगों की हत्या पर खेद प्रकट किया है.कांग्रेस ने पिछले 12 अप्रैल से परिवर्तन यात्रा की शुरूआत की है और राज्य में इसी साल चुनाव भी होने वाले हैं. नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को लेकर पहले ही धमकी दी थी. खासकर माओवादियों के खिलाफ सलवा जुड़ूम अभियान का समर्थन करने वाले कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा को लेकर माओवादिओं का गुस्सा पुराना था. इस हमले की निंदा होने के साथ साथ इस बात पर भी बहस जारी है कि क्या माओवादियों की हिंसा के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर्याप्त है.
(सलमान रावी, बीबीसी संवाददाता)

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