Saturday, May 25, 2013


माओवादी खतरे के बीच राज्य में विस्फोटकों की आवक ठप
-एसईसी एल समेत समूचे खनन उद्योग पर खतरा, बिजलीघरों को कोल आपूर्ति पर भी असर
-नए आदेश के तहत विस्फोटक का परिवहन हथियारबंद जवानों की मौजूदगी में होगा
केंद्र सरकार द्वारा विस्फोटकों की सप्लाई को लेकर लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों से साउथ ईस्टर्न कोल लिमिटेड समेत छत्तीसगढ़ के समूचे खनन उद्योग पर खतरा मंडराने लगा है। पिछले एक सप्ताह से राज्य में विस्फोटकों की आवक पूरी तरह से बंद है। एक तरफ जहां कोयले का उत्पादन घटा है, वहीं बिजलीघर भी कोयले की कमी से कराह रहे हैं। माओवादी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन ने विस्फोटकों की सप्लाई के नियम बेहद कड़े कर दिए हैं। पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन द्वारा जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि विस्फोटक का परिवहन प्रत्येक जिले में हथियारबंद जवानों की मौजूदगी में होगा।
अकेले एसईसीएल में सालाना एक लाख टन विस्फोटकों का इस्तेमाल खनन कार्य में होता है। कोल इंडिया लिमिटेड में विस्फोटकों की सालाना खपत चार लाख टन लगभग है। छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 50 से 60  ट्रक अमोनियम नाइट्रेट की आवक विभिन्ना माइनिंग कार्यों लिए होती है। विस्फोटकों का परिवहन ठप होने से विभिन्ना खनन उद्योग, बिजलीघरों की स्थिति खराब हो गई है। अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सिर्फ बिजलीघर ही नहीं, सीमेंट, लोहा और स्टील से जुड़ी परियोजनाओं पर इसका भयावह असर पड़ना तय है। गौरतलब है कि बिजलीघरों के पास एक निश्चित अवधि का ही कोल स्टाक मौजूद है।
तीन दिन पहले पुलिस अधीक्षकों को देनी होगी परिवहन की जानकारी
शनिवार को एक अन्य आदेश जारी कर संगठन ने देश भर के विस्फोटक उत्पादकों की नींद उड़ा दी है। आदेश में कहा गया है कि विस्फोटकों के परिवहन से तीन दिनों पहले सप्लायरों को मार्ग में आने वाले सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को ई-मेल के द्वारा या फिर हाथोहाथ सूचना देने का आदेश दिया है। साउथ ईस्टर्न कोल लिमिटेड के अधिकारियों ने नईदुनिया के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि निश्चित तौर पर इस आदेश का जबर्दस्त असर पड़ा है। मुमकिन है कुछ दिनों में स्थिति सुधर जाएगी।
अमोनियम नाइट्रेट के औद्योगिक लाइसेंस लेने का भी आदेश
विस्फोटक उत्पादकों के लिए चिंता का विषय वह आदेश भी है, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट को रसायनों की श्रेणी से हटाकर विस्फोटकों की श्रेणी में रख दिया गया है। इसके लिए अलग से औद्योगिक लाइसेंस लेने को कहा गया है। गौरतलब है कि अमोनियम नाइट्रेट का बड़े पैमाने पर कृषि कार्यों में भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर केंद्र सरकार की नींद तब जागी, जब कई आतंकी वारदातों में इसके इस्तेमाल का खुलासा हुआ। आतंकवादियों और माओवादियों द्वारा अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कई बार बड़े ब्लास्ट में भी किया गया है। हैदराबाद में हुए विस्फोट में भी अमोनियम नाइट्रेट के इस्तेमाल की पुष्टि हो चुकी है। छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में पूर्व में कई बार गैरकानूनी ढंग से अमोनियम नाइट्रेट का परिवहन करने वाले वाहनों को पकड़ा गया था।
कंपनियों का उत्पादन घटा
मौजूदा स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए पावर इंजीनियरिंग फेडरेशन के शैलेन्द्र दुबे कहते हैं कि इस वक्त छत्तीसगढ़ समेत देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली की मांग 9 से 10 फीसदी तक बढ़ गई है। अगर तात्कालिक तौर पर इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो इसके बेहद गंभीर नतीजे होंगे। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में ही नहीं, पूरे देश में बिजली का ज्यादातर उत्पादन कोयले पर निर्भर है और देश में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की आपूर्ति का 80 फीसदी हिस्सा कोल इंडिया लिमिटेड के द्वारा ही पूरा किया जाता है। एनएमडीसी लिमिटेड को विस्फोटकों की सप्लाई करने वाली प्रीमियर एक्सप्लोसिव के निर्देशक एएन गुप्ता कहते हैं कि इन आदेशों के बाद हमारी उत्पादन क्षमता आधी रह गई है। अगर ऐसी स्थिति ज्यादा दिनों तक रही तो हमें अपने कारखाने बंद करने होंगे।
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विदेश तो दूर, देश के राज्यों तक नहीं पहुंच रहे पुलिस के हाथ
00 वारंट पंेडिंग, फाइल खा रही धूल
0 16 प्रदेशों के 458 अपराधियों के स्थायी वारंट पेंडिंग
0 30 साल से वारंटों की तामीली नहीं करा सकी है पुलिस
0 सबसे ज्यादा ओडिशा के अपराधियों के खिलाफ वारंट जारी
रायपुर। राजधानी पुलिस के हाथ विदेश तो दूर, देश के दूसरे राज्यों में छिपे अपराधियों तक नहीं पहुंच रहे हैं। छत्तीसगढ़ को छोड़, 16 राज्यों के 458 अपराधियों के स्थायी वारंट अधिकतम तीन दशक से पेंडिंग है। पुलिस उसकी तामीली नहीं करा पा रही है। दीगर राज्यों में सबसे ज्यादा ओडिशा के अपराधियों के खिलाफ यहां वारंट जारी हुआ है। उसके बाद उत्तरप्रदेश और फिर बिहार के अपराधियों का नम्बर है।
औद्योगिक राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों के अपराधियों की आमदरफ्त लगातार बढ़ी है। केवल राजधानी में ही लगभग डेढ़ दर्जन राज्यों के अपराधी हैं। दीगर राज्यों के अपराधियों ने यहां हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, चोरी, उठाईगिरी, नारकोटिक्स के अपराधों को अंजाम दिए हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस को दूसरे राज्यों से अपराधियों को पकड़कर लाने में बिल्कुल भी सफलता नहीं मिली है, लेकिन फरार आरोपियों की सूची भी काफी लंबी है। वारदात करने के बाद फरार हुए साढ़े चार सौ से अधिक अपराधियों को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई, जबकि ऐसे अपराधियों के खिलाफ कोर्ट ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। उसके बाद भी पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है।
विदेश के लिए इंटरपोल, यहां कुछ नहीं
विदेश भागने वाले कुछ बड़े अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस इंटरपोल से मदद लेने लगातार प्रयास कर रही है। कुछ के इंटरनेट पर फोटो और बायोडाटा भी जारी कर दिए गए हैं, लेकिन देश के दूसरे राज्यों में छिपे अपराधियों को पकड़ने के लिए इस तरह के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, जिनके वारंट सालों से पेंडिंग हैं, उनकी फाइल धूल खाती पड़ी है।
छह राज्यों के अपराधियों ने किया परेशान
इसी साल एसपी ऑफिस से जारी हुए पेंडिंग स्थायी वारंट सूची के आंकड़ें बताते हैं कि राजधानी की कानून व्यवस्था को छह राज्यों के अपराधियों ने ज्यादा बिगाड़ा है। इसमें ओडिशा के अपराधी सबसे ऊपर हैं। ओडिशा के 87 अपराधियों के वारंट पेंडिंग हैं, जबकि उत्तरप्रदेश के 76, बिहार के 70, मध्यप्रदेश के 57, महाराष्ट्र के 48 और पंजाब के 45 अपराधियों के खिलाफ भी स्थायी वारंट जारी हुए हैं।
ढाई हजार से ज्यादा वारंट की तामीली नहीं
दीगर राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ के विभिन्न् जिलों के कुल दो हजार 746 अपराधियों के स्थायी वारंट तामील नहीं कराए जा सके हैं। किसी थाने में 40 साल पुराना वारंट पड़ा है तो कहीं 25-30 साल। कोतवाली थाने में सबसे ज्यादा 573 वारंट पेंडिंग हैं। दीगर राज्यों के वारंट की बात करें तो आमानाका थाने का पेंडिंग है। उसके बाद गंज (58 स्थायी वारंट) और फिर उरला (48 स्थायी वारंट) में लंबित है।
राज्य और पेंडिंग वारंट
ओडिशा- 87
उत्तरप्रदेश- 76
बिहार- 70
मध्यप्रदेश्ा- 57
महाराष्ट्र- 48
पंजाब- 45
प. बंगाल- 18
आंध्ा्रप्रदेश- 16
झारखंड- 8
कर्नाटक- 8
हरियाणा- 7
राजस्थान- 6
दिल्ली- 5
तमिलनाडु- 4
गुजरात- 2
उत्तरांचल- 1
अज्ञात- 1
छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के पेंडिंग स्थायी वारंट की तामीली के लिए थानेदारों को नए सिरे से कवायद करने के निर्देश दिए गए हैं। अपराधियों के ठिकानों का पता लगाया जा रहा है। जानकारी मिलने पर पुलिस की टीमें भी रवाना करने के निर्देश हैं।
ओपी पाल
एसपी, रायपुर
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खदानों में विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल पर पुलिस की निगाह
0 खदानों में जिला प्रशासन के छापे के बाद एसपी ने दिए निर्देश
0 विस्फोटकों के गलत इस्तेमाल की शिकायत पर अलर्ट हुई पुलिस
रायपुर। जिले के के्रशर और गिट्टी  खदानों में पिछले दिनों  जिला प्रशासन द्वारा की गई छपामार कार्रवाई के बाद पुलिस चौकन्नाी हो गई है। खासकर खदानों में विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल को लेकर पुलिस ने नजर रखना शुरू कर दिया है। खदानों में अवैध तरीके से विस्फोटक सामग्री का उपयोग करने की शिकायतें सामने आई हैं। एसपी ओपी पाल ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन की छापामार कार्रवाई की पूरी जानकारी लेने के बाद खदानों में की जा रही गड़बड़ियों के जांच के निर्देश आला अफसरों को दिए हैं।
राजधानी से लगे मंदिर हसौद, नई राजधानी, तेलीबांधा अभनपुर इलाके में सैकड़ों की संख्या में गिट्टी खदाने व क्रेशर हैं। इन खदानों में पत्थर तोड़ने के लिए डेटोनेटर, बारूद जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जाता है। खदान संचालक लाइसेंस लेकर विस्फोटकों की खरीदी करते है। जब-जब खदान में  विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल करना होता है, नियमानुसार संबंधित पुलिस थाना और खनिज विभाग को जानकारी देना अनिवार्य है। यहीं नहीं विस्फोटक कब और कितनी मात्रा में इस्तेमाल किया गया, इसका हिसाब-किताब स्टाक पंजी में दर्ज करना जरूरी है। लेकिन  पिछले लंबे समय से खनिज विभाग की उदासीनता से खदानों में भारी गड़बड़ी की शिकायतें आम हो गई हैं। मसलन कहीं के्रशर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं तो कही अवैध उत्खनन की जा रही है। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखकर कलेक्टर ने जिला प्रशासन की एक टीम भेजकर दो दर्जन से अधिक खदानों व के्रशर की जांच करवाई थी। जांच में अनेक गड़बड़ियों के खुलासे के बाद मौके पर अवैध रूप से संचालित पांच खदानों को अधिकारियों ने सील कर दिया था।
नियमों की अनदेखी पड़ेगी मंहगी
एसपी ओपी पाल ने संबंधित थानेदारों को अपने क्षेत्र में स्थित खदान व के्रशर की नियमित रूप से जांच करने के साथ ही खदान में इस्तेमाल हो रही विस्फोटक सामग्रियों का पूरा हिसाब-किताब लेने को कहा है। उन्होंने नियमों की अनदेखी करने वाले खदान संचालकों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने निर्देश दिए हैं। राजधानी से लगे मंदिर हसौद, सेरीखेड़ी, मूरा, नरदहा, धनसुली और अकोलडीह, खपरी तथा अभनपुर इलाके में बहुतायत में के्रशर व गिट्टी खदान हैं। वस्फोटकों के उपयोग के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करने में पट्टेधारी लापरवाही बरतते हैं।
मचा हड़कंप
खदानों में पुलिस की निगाह टिकने से संचालकों में हड़कंप मच गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि खदानों में 50 से अधिक श्रमिक काम करते हैं, भारी मशीनरी से खनन काम होता है। जिन खदानों में गहराई 6 मीटर से अधिक होती है और जहां पर विस्फोट के लिए बारूद का उपयोग होता है, वहां माइन्स एक्ट 1952 में निहित प्रावधान प्रभावशील हैं। खदान में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध होना जरूरी है। खदान में खनिज उत्खनन, सुरक्षा उपायों, फर्स्ट एड बॉक्स, पिटपास, उपस्थिति पंजी, बिक्री पंजी, कर्मचारियों की नियुक्ति, खनिज रायल्टी आदि की जानकारी पट्टेधारी से ली जा रही है।
वर्जन-
खदानों में विस्फोटकों का इस्तेमाल कब और कैसे किया जाता है, इसकी जानकारी ली जा रही है। गड़बड़ी सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ओपी पाल, एसपी, रायपुर
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शहरों और आर्थिक तंत्र पर माओवादी निशाना
-सरकारी प्रतिष्ठान बने माओवादियों के साफ्ट टारगेट
-विशेषज्ञों की निगाह में शुरू हो गया माओवाद का सेकेण्ड स्टेज
जगदलपुर में दूरदर्शन के रिले केंद्र पर माओवादियों द्वारा किया गया हमला केवल सुरक्षाबलों के साथ बदले की कार्यवाही भर नहीं है, माओवादी इस हमले के बहाने शहरों और सरकारी प्रतिष्ठानों तक अपनी आसान पहुंच को भी साबित करना चाह रहे हैं। गौरतलब है कि इस घटना के महज 48 घंटों पहले माओवादियों ने बिहार के जमुई तहसील के एक भीड़-भाड़ वाले कस्बाई इलाके में एक साथ आठ स्कूलों की इमारतों को उड़ा दिया था।  माओवादियों द्वारा पंचायत भवन, रेलमार्गों और मोबाइल टावरों को उड़ाने की वारदातें जब-तब सामने आती रहती हैं। वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ अलोक बंसल जब यह कहते हैं कि माओवादी अब दूसरे स्टेज में पहुंच गए हैं तो यह बात गलत नहीं लगती। वे कहते हैं-ऐसी घटनाओं के बाद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि शहर की ओर बढ़ रहे माओवादी आर्थिक ढांचे के साथ-साथ सूचना तंत्र को छिन्ना-भिन्ना करना चाहते हैं। छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सरकारी ढांचों पर माओवादी हमला कोई नई बात नहीं है, पिछले वित्तीय वर्ष में माओवादियों ने 21 आर्थिक संरचनाओं पर हमले किये थे। इस दौरान 27 दिसंबर -2011 को माओवादियों ने दंतेवाड़ा जिले की गीदम तहसील में पुलिस स्टेशन की दो मंजिली इमारत को विस्फोट से उड़ा दिया था। यह जगह दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से महज 10 किमी दूर और नेशनल हाइवे के नजदीक है। माओवादियों के रोज ऐसे हमले बताते हैं कि माओवादी सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में कमी का फायदा उठाते हुए वे शहरी क्षेत्रों में ऐसे हमले कर रहे हैं।

माओवादियों के शहरी इलाकों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमले की बढ़ती घटनाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2009 से 2012 के अगस्त तक माओवादियों ने देशभर में 1100 से अधिक आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हमले किए।  इनमें से ज्यादातर सरकारी थे। निश्चित तौर पर आर्थिक ढांचों का एक बड़ा हिस्सा शहरी या कस्बाई आबादी में है। इसलिए वहां हमले करने का मतलब दहशत को जंगलों से शहर की ओर ले जाना है।
सरकारी इमारतों पर 2008 में सर्वाधिक हमले
पहले के वर्षों में घटनाओं का प्रतिशत बेहद कम था। यानी की वक्त के साथ-साथ माओवादियों ने अर्थतंत्र और सूचना तंत्र को तोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। निश्चित तौर पर इस कवायद में खून भी बहा और खूब बहा। अगर 2011 तक के आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि सरकारी इमारतों पर हमले की राज्य में सर्वाधिक घटनाएं 2008 में (71)घटी थीं। वर्ष 2009 में 36, 2010 में 42 और 2011 में महज 21 इमारतों पर हमले हुए।
लगभग एक हजार करोड़ की क्षति पहुंचाई
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से वर्ष 2009 तक माओवादियों द्वारा लगभग 600 करोड़ रुपए मूल्य की 80 सड़कों, 22 बैंक भवनों, 297 सरकारी वाहनों, सीमा सड़क संगठन के 58 वाहनों, बिजली के 66 टॉवरों , निजी व्यक्तियों के 66 वाहनों व रेलवे की 26 लाइनों, 60 वन डिपो, 97 स्कूल भवनों, 68 पंचायत भवनों, 3 अस्पताल भवनों, नागरिक आपूर्ति विभाग की 33 दुकानों को नष्ट किया जा चुका था। अगर इनमें पिछले पांच साल के आंकड़े और जोड़ दिए जाएं तो ये नुकसान एक हजार करोड़ के आसपास पहुंचता है।
बड़ी सफलता की कोशिश
शहरी इलाकों के आर्थिक ढांचों पर बार-बार होने वाले हमले बताते हैं कि माओवादी साफ्ट टार्गेट पर निशाना लगाकर बड़ी सफलता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। ये बिलकुल असंभव-सी बात है कि हम हर आर्थिक संरचना को माओवादी खतरे से सौ फीसदी दूर रखें। पुलिस के एक आला अधिकारी बताते हैं कि हाल के दिनों में हमें पर्याप्त खुफिया जानकारी प्राप्त हुई है, जिसके मुताबिक नक्सली रायपुर सहित शहरी क्षेत्रों के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला करने के फिराक में हैं, ताकि उनके खिलाफ जंगलों में की जा रही कार्रवाई कमजोर पड़ सके। 
वे जहां कहीं भी हैं, हम उन पर निगाह रखे हुए हैं। शहरों में उनका बेस हम नहीं बनने देंगे। जगदलपुर की घटना निश्चित तौर पर एक चुनौती है, लेकिन हम हर तरह की चुनौती का मुकाबला करने में सक्षम हैं।
रामनिवास, छत्तीसगढ़ ,डीजीपी

हम कह सकते हैं कि माओवादियों का हौसला और आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे जंगलों से शहरों की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे में बेहद जरूरी है कि जंगलों में तो उन पर दबाव बनाया ही जाए। शहरों में भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाए। ये वक्त अति-आत्मविश्वास में गलतियां करने का कतई नहीं है। हमें हर तरह की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना होगा।
आलोक बंसल, वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ
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ट्रेनों में सक्रिय गिरोहबाजों का बन रहा एलबम
0 जीआरपी पहली बार देशभर से जुटा रही रिकॉर्ड
0 90 अपराधियों का फोटो समेत क्राइम रिकॉर्ड तैयार
ट्रेनों में उठाईगिरी, ठगी, चोरी और पॉकेटमारी की वारदात को अंजाम देने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्यों का एलबम बनाया जा रहा है। पहली बार जीआरपी अपराधियों की पहचान और उनकी धरपकड़ के लिए इस तरह की तैयारी कर रही है। अब तक जीआरपी ने अंतरराज्यीय गिरोहों के 90 अपराधियों का फोटो और उनका क्राइम रिकॉर्ड तैयार कर लिया है।
पुलिस की क्राइम ब्रांच की तरह जीआरपी भी अब ट्रेनों में सक्रिय अपराधियों को पकड़ने के लिए प्रदेश के दूसरे जिलों और अन्य राज्यों में छापामार की कार्रवाई करेगी। उसने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। अभी जीआरपी की टीम उन अपराधियों का नाम, पता, हुलिया, फोटो और क्राइम रिकॉर्ड जुटाने में लगी है, जो पहले पकड़े जा चुके हैं। ऐसे अपराधियों का रिकॉर्ड संबंधित जीआरपी थाने से जुटाया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही जीआरपी की एक टीम झारखंड के धनबाद और रांची भेजी गई थी। दोनों जिलों के जीआरपी थाने से अपराधियों की जानकारी लेकर टीम लौट आई है। अब फोटो समेत अपराधियों के डिटेल कम्प्यूटर में डाले जा रहे हैं। जीआरपी के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही टीम बिहार, हरियाणा और दिल्ली भी भेजी जाएगी, जहां अपराधियों के ठिकानों का पता चला है। इसके बाद बाकी राज्यों में भी टीम जाएगी।
नशा खिलाने वाले बिहार-झारखंड के :
ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों से परिचय कर उन्हें खाने-पीने की चीजों में नशा खिलाकर लूटने वाला गिरोह बिहार और झारखंड का है। बिहार के बेतिया जिले के ग्राम जोगापट्टी और झारखंड के धनबाद जिले के ग्राम जमतरा में इस तरह से वारदात करने वाले गिरोहों का ठिकाना है। अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों की आधी आबादी देशभर में घूमकर यात्रियों से लूट की वारदात करती है। पिछले माह की 14 तारीख को यहां के जीआरपी ने जमतरा के दो और जोगापट्टी के दो लोगों को पकड़ा था, जो अब जेल में हैं।
एसी का टिकट लेकर उठाईगिरी :
हरियाण्ाा और दिल्ली के बीच के इलाकों में सांसी जनजाति गिरोह के लोग रहते हैं। यह गिरोह उठाईगिरी करने के लिए लंबी रूट की ट्रेनों में बाकायदा एसी का टिकट लेकर सफर करता है। गिरोह में चार-पांच लोग होते हैं। यात्री जब अपना स्टेशन आने से पहले ही लगेज गेट पर ले जाते हैं, तब यह गिरोह लगेज को घेरकर खड़ा हो जाता है और मिनटों में मास्टर की से लॉक खोलकर लगेज से सामान निकाल लेते हैं और लॉक को फिर से बंद कर देते हैं। इस कारण यात्री को चोरी का पता नहीं लग पाता है। 
लुटेरों ने बदला रूट
जीआरपी अधिकारियों ने बताया कि रायपुर से बिलासपुर और दुर्ग के बीच चेकिंग बढ़ा दी गई है। इस कारण अब यात्रियों को नशा खिलाने वाले लुटेरों ने अपना रूट बदल दिया है। अब वे बिलासपुर से आगे कोरबा, चांपा, रायगढ़, जांजगीर और दुर्ग से आगे गोंदिया, नागपुर और राजनांदगांव रूट पर वारदात कर रहे हैं।
फिर भी पकड़ना होगा मुश्किल
अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों में वारदात करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह एक ही स्थान पर नहीं रुकता है। एक ट्रेन में वारदात करने के तत्काल बाद गिरोह स्टेशन में उतर जाता है और ट्रेन बदलकर दूसरी जगह पहुंच जाता है। ऐसे गिरोह के लोग अपने मूल ठिकाने पर भी बहुत कम जाते हैं।

अंतरराज्यीय गिरोहों के सदस्यों की जानकारी देशभर से जुटाई जा रही है। यह जानकारी कम्प्यूटर में अपराधियों के फोटो समेत डाली जाएगी, ताकि पीड़ित व्यक्ति से अपराधी की पहचान कराई जा सके। इससे पुराने क्राइम रिकॉर्ड वालों की पहचान आसानी से हो जाएगी। रिकॉर्ड अपडेट भी किया जाएगा।
केसी अग्रवाल
एसपी (रेल) रायपुर
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बेवसाइट बता रही-डीजीपी नवानी, मंत्रालय का पता डीकेएस
0 अफसर बदले, तस्वीरें और जानकारी पुरानी
0 कई सरकारी विभागों की वेबसाइट नहीं हुई हैं अपडेट
0 तबादलों के बावजूद वेबसाइट में पुराने अफसर ही पद पर काबिज
0 देश-विदेशों में सरकारी वेबसाइट देखने वालों को हो रही परेशानी
छत्तीसगढ़ के अधिकांश सरकारी विभागों ने अपनी वेबसाइट तो शुरू करा ली है, लेकिन उन्हें अपडेट कराने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई सरकारी विभागों की वेबसाइट में तबादलों के बावजूद पुराने अफसर ही पद पर काबिज हैं। पुराने अफसर की जगह वर्तमान में काबिज अफसरों के नाम और फोटो नहीं डाले गए है। इसी तरह कुछ विभागों की वेबसाइट में जानकारियां भी पुरानी हैं। वेबसाइट अपडेट नहीं होने के कारण देश ही नहीं, विदेशों में सरकारी वेबसाइट देखने वालों को परेशानी होती है।
डीजीपी अब भी नवानी
एक दिसंबर 2012 को छत्तीसगढ़ पुलिस के मुखिया बदल चुके हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस की वेबसाइट में अब भी पुराने डीजीपी अनिल एम नवानी का नाम और फोटो दिखाई पड़ रहा है। 30 नवंबर 2012 को श्री नवानी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान में डीजीपी रामनिवास हैं। वेबसाइट के होम पेज या किसी भी लिंक में रामनिवास का न तो नाम दिखाई पड़ रहा है और न ही फोटो। जबकि, एडीजी आरके विज का नाम और फोटो अपडेट हुआ है।
माशिमं में 2012 का परीक्षा परिणाम
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की विभागीय वेबसाइट में जानकारियां अपडेट नहीं की गई हैं। परीक्षा की समय-सारिणी से लेकर केंद्रों की सूची, केंद्राध्यक्षों के लिए आदेश और परीक्षा परिणाम तक वर्ष 2012 के दिए गए हैं। यह वेबसाइट पांच मार्च, 2011 से अस्तित्व में है। माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट अपडेट नहीं होने पर विद्यार्थियों के साथ स्कूल प्रबंधनों को भी दिक्कत होती है।
कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राउत
कृषि विभाग की आधिकारिक विभागीय वेबसाइट भी पुरानी जानकारियों के साथ अस्तित्व में है। विभाग के प्रमुख सचिव के पद से एमके राउत हट चुके हैं, इसके बावजूद वेबसाइट में चढ़ा हुआ है। वर्तमान में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अजय सिंह हैं। वेबसाइट में अधिकारियों के पद को अपडेट नहीं किया जा रहा है, जबकि होम पेज के नोटिस बोर्ड पर डाली जाने वाली जानकारी जैसे टेंडर, लगातार अपडेट हो रही है।
वेबसाइट में परिवहन की गाड़ी अटकी
छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग की वेबसाइट सीजी टांसपोर्ट डॉट ओआरजी की गाड़ी भी अटकी हुई है। विभाग के एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एमएस तोमर का तबादला हो चुका है। हेमकृष्ण राठौर को एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर पद का चार्ज लिए लगभग एक माह हो गया है, उसके बावजूद एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का रिकॉर्ड वेबसाइट में अपेडट नहीं किया जा सका है। इसी तरह कई जिलों के आरटीओ की सूची में पुराने अधिकारियों के नाम चढ़े हुए हैं।
पुरातत्व के सचिव नहीं बदले
छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की वेबसाइट सीजी कल्चर डॉट इन में संचालक एवं प्रमुख सचिव केडीपी राव का नाम और फोटो डला हुआ है। जबकि, वर्तमान में विभाग के सचिव आरसी सिन्हा हैं। वेबसाइट में टेंडर संबंधी जानकारी को तो अपडेट किया जा रहा है है, लेकिन अधिकारियों की नहीं।
क्रॉफ्ट में अधिकारियों की जानकारी नहीं
छत्तीसगढ़ शिल्प विभाग की वेबसाइट इंडिया अंडरस्कोर क्रॉफ्ट डॉट कॉम में कांटेक्ट अस दिया गया है, लेकिन उसका लिंक नहीं है। इस कारण वेबसाइट देखने वालों को विभाग के अधिकारियों की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
पुराने मंत्रालय का पता नहीं हटा
लैटरहेड की तरह अधिकांश सरकारी वेबसाइट में भी अब तक पुराने मंत्रालय दाऊ कल्याण सिंह भवन का पता डला हुआ है। जबकि, पुराने मंत्रालय में संचालित विभाग नए रायपुर स्थित महानदी भवन में शिफ्ट हो गए हैं।


0 परिवहन विभाग की वेबसाइट को अपडेट नहीं किया गया है, इसकी जानकारी है। जल्द ही उसे अपडेट कराया जाएगा।
हेमकृष्ण राठौर
एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर
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 दस दिन पहले ही मैंने प्रभार लिया है। मुझे जानकारी नहीं थी कि संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की वेबसाइट अपडेट नहीं है। जल्द ही अपडेट करा ली जाएगी।
आरसी सिन्हा, सचिव, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग
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क्या फर्क पड़ता है वेबसाइट से। डीजीपी तो मैं हूं ना। पुलिस की वेबसाइट जल्द ही अपडेट करा ली जाएगी।
रामनिवास,डीजीपी





 

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