Thursday, March 11, 2010

दो कैदी फरार,जेल का बैंड बजा


वैवाहिक कार्यक्रम में बैंड बजाते समय भागे सजायाफ्ता कैदी

रायपुर। बुधवार की रात एक वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान बैंड पार्टी में शामिल होकर बैंड बजा रहे सेन्ट्रल जेल के दो कैदी कालीबाड़ी चौक से जेल प्रहरियों को चकमा देकर भाग निकले। घटना की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने अपराध दर्ज कर फरार कैदियों की तलाश शुरू कर दी है। जेल के कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शासन स्तर पर विभिन्न रोजगारमूलक कार्यक्रम चलाए जा रहे है। इसी क्रम में बैंडपार्टी गठित कर इसमें प्रशिक्षित कैदियों को जेल की चाहर दीवारी के बाहर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भेजा जाता है। पुलिस ने बताया कि बुधवार को शीतला कालोनी पंडरी निवासी नंदकुमार डोंगरे ,सुनील डोंगेरे के यहां वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित था। इसमें जेल की आस्था नामक बैंडपार्टी की बुकिंग की गई थी। तयशुदा कार्यक्रम के तहत शाम से ही बैंड बजाने के लिए पूरे साजों-सामान के साथ जेल के 16 कैदियों को पंडरी लाया गया था। कैदियों के साथ उन पर नजर रखने कुछ प्रहरियों को भी जेल प्रशासन ने भेजा था। पंडरी से कालीबाड़ी चौक के बीच निकली बारात में बैंड बजाते हुए सभी कैदी पहुंचे। इस बीच रात 8.30 बजे मौका पाकर बलवंत सारथी वल्द कदम (45) तथा गोपी उर्फ रागोपाल सिंह वल्द धरम सिंह (43) नामक कैदी मौका पाकर प्रहरियों को चकमा देकर भाग निकले। कैदियों के गायब होने का पता उस वक्त लगा जब समारोह खत्म हो जाने के बाद रात 10 बजे जेल वाहन से बैंडपार्टी के कैदियों को वापस लाया गया। गिनती में दो कैदियों को कम पाकर प्रहरियों के होश उड़ गए थे। वरिष्ठ अधिकारियों को जब यह सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। फरार कैदी बलवंत सारथी मूलत: बीरगांव व्यास तालाब के पास खमतराई हाल मुकाम जवाहरपारा ,बालौद,दुर्ग का निवासी है। दुर्ग न्यायालय से उसे हत्या के मामले में 2 जनवरी 2001 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वही मूलत: ग्राम राजाडेरा,पिथौरा,महासंमुद निवासी गोपी उर्फ रामगोपाल सिंह को अनाचार व हत्या के प्रयास के मामले में 8 अक्टूबर 08 को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया था। तब से दोनों सेन्ट्रल जेल में सजा काटते आ रहे थे। बहरहाल दौ कैदियों के फरार होने के मामले में कोतवाली पुलिस ने जेल अधीक्षक की ओर से रमेश साहू (43) की रिपोर्ट पर मामले में धारा 224 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। जेल प्रशासन के साथ पुलिस ने मिलकर फरार कैदियों की सरगर्मी से तलाश शुरु कर दी है। उनके घरों में भी दबिश दी गई लेकिन कही कोई पता नही चल पाया।
दो प्रहरियों के भरोसे थे 16 कैदी

बैंडपार्टी में कुल 16 कैदी शामिल थे। इनकी ज्यादा संख्या होने के बावजूद जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को नजर अंदाज करना भारी पड़ गया। कैदियों को लाने और ले जाने के लिए मात्र दो प्रहरी राधेश्याम गोरे,जितेन्द्र मसीह तथा वाहन चालक रसीद खान की ड्यूटी लगाई गई थी। बताया गया कि कैदियों के फरार होने का पता कालीबाड़ी चौक में ही प्रहरियों को लग गया था, बावजूद उन्होंने जेल अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी नहीं दी। इसका पता न चल सके, इसलिए फरार कैदियों की तलाश स्वयं प्रहरी करते रहे। लेकिन जब उनका कोई पता नहीं चला तब प्रहरियों ने यह जानकारी वरिष्ठ अफसरों को दी।

निलंबित किए गए प्रहरी

सेन्ट्रल जेल अधीक्षक डा।केके गुप्ता ने बताया कि बैंडपार्टी के दो कैदियों के फरार होने की जानकारी विलंब से देने के मामले राधेश्याम गोरे और जितेन्द्र मसीह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। फरार कैदियों की तलाश की जा रही है।

1 comment:

  1. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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