Thursday, August 8, 2013

दस लाख परिवार आशियाने से वंचित


हर शख्स की चाहत होती है, कि उसका एक आशियाना हो जहां वह अपने परिजनों के साथ चैन से जिंदगी बिता सके। अमीरों के लिए घर बनाना बड;ी बात नहीं मगर जो लोग दो वक्त के निवाले के लिए दिन रात भाग दौड; कर रहे हैं, उन्हें अपनी छत बड;ी मुश्किल से नसीब हो पाती है। ऐेसे बेघरों को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने इंदिरा आवास योजना शुरू की। मगर इसका लाभ लोगों को नहीं मिला पाया है बल्कि लाभ लेने के लिए बेघरों को चप्पलें घिसनी पड; रही है। क्योंकि उनका नाम सर्वे सूची में है, ही नहीं। मकानों के लिए सर्वे भी 2002 में हुआ था उसके बाद जो गरीब बेघर हुए उन्हें घर नहीं मिल पाए हैं। इस वक्त आर्थिक सामाजिक सर्वेेक्षण के जरिए जरूर ऐसे परिवारों की सुध ली जा रही है। मगर विधानसभा चुनाव करीब होने के कारण सर्वे के बाद जिनके नाम जुडेंगे उन्हें इतने जल्दी भी मकान नसीब नहीं हो पायेगा। उसके लिए भी इंतजार तो करना ही पड;ेगा। अपै्रल से बन गया नया नियम इंदिरा आवासों के लिए 1 अपै्रल 2013 से केंद्र सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक अब मकान में शौचालय ओर स्नानागार बनान जरूरी है। शौचालय के लिए साढ;े 5 हजार टी एससीए, साढ;े 4 हजार नरेगा से मिलते हैं। 3200 रू. केंद्र और राज्य सरकार 1400 रूपए का अंशदान देती है। मकान महिला या फिर पति-पत्नि के नाम से ही बनाए जाते हैं। इंदिरा आवास के लिए तीन किश्तों में राशि जारी होती है, 25 फीसदी, 60 फीसदी और 15 फीसदी शौचालय के लिए 4 फीसदी कंटीन्जेंसी जैसे देनी होती है। अब सामाजिक सर्वे जरूरी कर दिया गया है। हरित क्षेत्र को बढ;ावा दिया जा रहा है। सशक्त कमेटी प्राकृतिक आपदा पीडि;त परिवारों, बीपीएल मैला ढोने वाले परिवारों और विमुक्त बंधुआ मजदूरों के बारे में फैसला करेगी। 60 फीसदी आबंटन एस.टी.एस.पी. 15 फीसदी अलपसंख्यक और 3 फीसदी राशि नि:शक्त जनों के लिए रहेगी। युद्ध में शहीद पुलिस, सेना की विधवाओं को भी आवास दिया जायेगा। मानसिक शारीरिक निशक्त भी मकान पा सकते हैं। आवास बनाने के लिए 3 साल की सीमा निर्धारित की गई । देर होने पर राज्य सरकार को खर्च वहन करना पड;ेगा।  मकान 9 माह में बनाना जरूरी होगा। मकानों में इंदिरा आवास का प्रतीक चिन्ह लगाना जरूरी होगा। केंद्र सरकार दो किश्तों में राशि जारी करेगी। जो कुल वार्षिक आबंटन का 50 फीसदी होगी। उसके 15 दिनों बाद ही राज्य सरकार को भी राशि देना जरूरी होगा। इब इस योजना को सोशल ऑडिट यूनिट से जोड;ा गया है। पक्का मकान जो 30 वर्ष तक रहे मकान की फोटो हर तीन माह में ली जाएगी। ताकि प्रगति पता चल सके। नए निर्देश के मुताबिक अब नए मकान बनाए जा रहे हैं।  यह है इंदिरा आवास योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बाढ; के बाद बेघर हुए लोग और वन अधिकार पट्टा प्रात लोगों को केंद्र सरकार की और से मकान बनाने के लिए राशि का प्रावधान है। इसके तहत सामान्य क्षेत्र में मकान बनाने के लिए 45000 रूपए और पहाड;ी क्षेत्रों के लिए 48000 रू. की राशि दी जाती थी जो 1 अपै्रल 2013 से 70.000 और 75000 रूपए हो गयी है। इस राशि का उपयोग करके कोई भी वंचित अपना मकान बना सकता है। इसमें राज्य सरकार भी अपना अंशदान करती है ताकि हितग्राही को पूरा लाभ मिल सके। छत्तीसगढ; में योजना का हाल वर्ष 2001 में हुए सर्वे के मुताबिक प्रदेश में 17 लाख 39 हजार परिवार थे। राज्य बनने के बाद से लेकर अब तक सिर्फ 5 लाख परिवारों को ही मकान उपलब्ध कराए गए हैं। जबकि 2001 के बाद यह संख्या 2013 तक लगभग 37 लाख हो चुकी है। इस बीच प्रदेश में आर्थिक सामाजिक सर्वे भी हो रहा है। पुराने सर्वे के अनुसार 17 लाख में से 5 लाख परिवारों को ही आवास बनाकर दिए गए हैं। इसलिए बाकी 10 लाख गरीब अभी भी बेघर ही हैं। जो सर्वे सूची में नाम जुड;वाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। दस लाख आवासों की जरूरत - एस.आलोक ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त सच्चिदानंद आलोक का कहना है राज्य बनने के बाद से अब तक 5 लाख मकान इंदिरा आवास योजना के तहत बनाए गए हैं। अभी 10 लाख मकानों की जरूरत हैं। अब वे रायपुर, दुर्ग, सरगुजा और कांकेर मेें वास स्थल का चयन कर गु्रप में मकान बनवा रहे हैं। वर्ष 2012 में 41511 मकान बनाए इनमें वनाधिकार पट्टा वाले 63000 मकान बनाए गए। बाढ; पीडि;तों के लिए 3 हजार मकानों की स्वीकृति मिल पाई है। 2001 के सर्वें के मुताबिक ही मकान बनाए गए हैं। बाकी 10 लाख को मकान नहीं मिल पाया है। पिछले साल के लिए केंद्र ने 145.23 करोड; राज्य सरकार ने 48.41 करोड; कुल 193.64 करोड; की राशि आबंटित की थी। इसमें 57.131 मकान बनाए गए 30.340 बनने बाकी हैं। बाढ; पीडि;तों के लिए 26.34 मकान बनाए गए हैं। इसके लिए 18 करोड; की राशि आबंटित की गई है। इसी तरह 63000 परिवारों को मकान मिला इसके लिए 295.57 करोड; रू. की राशि आबंटित की गई है। इस तरह जिन गरीब परिवारों का सर्वे सूची में नाम नहीं है, सूची में नाम नहीं हैं उन्हें अभी मकान के लिए इंतजार करना होगा।
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गुटखे पर प्रतिबंध...ठेंगे पर!

कमीशनखोरी प्रतिबंध को दिखाया ठेंगा, खाद्य विभाग की शह पर धंधेबाज लाल
रायपुर। एक तरफ सफेदपोश जनहित में जर्दायुक्त गुटखों पर प्रतिबंध का स्वांग कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकार के निर्देशों को धंधेबाज अंगूठा दिखाने में लगे हैं। राजधानी रायपुर समेत गुटखे की कालाबाजारी करने वालों की इस प्रतिबंध के बाद चांदी हो गई है। जर्दायुक्त गुटखे का बाजार हर महीने 50 लाख रुपए के आंकड;ों को पार कर गया है। कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के मद्देनजर सरकार बंदिश ने शौकिनों के लिए और खतरा पैदा कर दिया है। इस बनावटी प्रतिबंध से अमनपथ के छायाकार ने पर्दा उठाया। शहर मेें जिस तंबाखूयुक्त गुटखे पर रोक के दावे किए जा रहे हैं। वह आसानी से हर गली-कूचों और शहर के पनवाडिय;ों की गुमटियों में खुलेआम बिक रहा है। कीमत में पहले से दुगना इजाफा कर गुटखे के कमीशनखोर अब पैसों से खेल रहे हैं। प्रतिबंध को एक साल और बढ;ाने का आदेश जारी होते ही इसकी असलियत खोलती तस्वीर आप के सामने पेश है-

स्थान:- सिविल लाइन मुख्य मार्ग, समय:- दोपहर 12.30 बजे
राकेश नामक एक व्यक्ति को हमने शंकर पान दुकान में प्रतिबंधित गुटखा खरीदने भेजा। वहां लोकल और नकली राजश्री ब्रांड का तंबाखूयुक्त गुटखा 6 रुपए में एक पाउच खरीदा। प्रतिबंधित से पहले इसी गुटखे के एक पाउच की कीमत 1 से डेढ; रुपए थी।
स्थान:- पुलिस थाना टिकरापारा के पास, समय:- दोपहर 3 बजे
यहां भी हमारे छायाकार ने एक दुकान में युवक से गुटखा मांगा। यहां भी बेखौफ प्रतिबंधित गुटखे की अवैध बिक्री हो रही थी। यहां पर एक गुटखे पाउच की कीमत 6 रुपए थी। दुकानदार से जब रेट कम करने कहा गया तो उसने कहा 20 रुपए में 3 देते हैं चिल्हर में इतना ही मिलेगा।
स्थान:- शहीद स्मारक भवन के सामने, समय:- दोपहर 4.30 बजे
शहीद स्मारक भवन के ठीक सामने मुख्य मार्ग की गुमटी में भी धड;ल्ले से जर्दायुक्त गुटखा पाउच बिकता रहा। प्रतिबंध की खबर होने के बाद भी मुनाफाखोर 1 रुपए के पाउच का 6 रुपए और ज्यादा लेने पर प्रति पाउच 3 रुपए कमीशन वसूलते रहे। अमनपथ के छायाकार ने पुराने दाम पर गुटखा मांगा तो दुकानदार ने पान मसाला सप्लायर की दलाली बढ)े की बात कही।

खुलेआम बाजार में मोलभाव
राजश्री पुड;ा -300 रुपए
प्रतिबंध से पहले इसका मूल्य 92 रु. था
नकली राजश्री का मूल्य प्रति पुड;ा 200 रु.
पानराज ब्रांड गुटखा 140 रु.ब्लैक में बिक रहा
जर्दायुक्त नजर गुटखा 90 रु.ब्लैक में मिल रहा है
प्रतिबंध से पहले इसकी कीमत महज 55 रु.थी

कानून सख्त, अफसर नरम

प्रतिबंधित गुटखा बेचने पर अर्थदंड
बेचने वाले को सश्रम कारावास का प्रावधान
2 से 10 लाख रु.तक जुर्माना
जर्दायुक्त गुटखा बनाते पकड;े  जाने पर जेल भी
नकली गुटखा बेचने वालों पर ज्यादा सख्त कानून
डी गैंग का राज!
रायपुर, भाटापारा, तिल्दा में सबसे ज्यादा डी-फैक्ट्री, नकली उत्पादन पर अंकुश लगाने में नाकाम प्रशासन, नकली माल का मार्केट 3000 करोड; का
रायपुर। छत्तीसगढिय;ों की थाली से लेकर रसोई तक और घर से लेकर दफ्तर तक नकली उत्पादन पैठ बना चुका है। राजधानी समेत प्रदेश के तीन शहरों में यह गोरखधंधा अपने शबाब पर है। इन धंधेबाजों पर नकेल डालने के लिए अधिकृत प्रदेश के दो विभाग महज मूकदर्शक बने बैठे हैं। राजधानी समेत भाटापारा, तिल्दा में संचालित डुप्लिकेट उत्पादन वाली फैक्ट्रियां लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं। रसोई घर से दफ्तर तक और लोगों की थाली से शौक तक में नकली माल लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा कर रहा है। राज्य निर्माण से लेकर अब तक इस धंधे का बाजार 3000 करोड; के आंकड;े को पार कर गया है। खाद्य सामग्रियों से लेकर कॉस्मेटिक्स, रसोई गैस सिलेंडर, मिठाईयां भी घटिया और नकली हैं। राज्य खाद्य एवं औषधिय विभाग और खाद्य नियंत्रक दफ्तर की उदासीनता के चलते दस साल में नकली माल उत्पादन में रिकार्ड कायम कर चुके हैं। यहां तैयार नकली उत्पादनों का अंतर्राज्यीय बाजार भी तैयार हो गया है
नाक के नीचे चल रही थी नकल
0 पंकज इस्पात में सेल के नाम से 600 टन से ज्यादा नकली सरिया बाजारों में बिक गया
0 नचीकेत उर्फ मोंटू तापडिय;ा की 1200 करोड; की नकली गैस सिलेंडर निर्माण फैक्ट्री
0 सालों से नकली सरसों तेल और असली घी बनाने की फैक्ट्री चल रही थी राजधानी में
0 मिलावटी बेसन, मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और हल्दी पाउडर बाजारों में खप रहे
0 सिगरेट, गुटखा, तंबाखू और खैनीयुक्त गुटखा फैक्ट्रियां भाटापारा में संचालित हैं

कहां कितने का नकली मार्केट
0 रायपुर में हर साल 200 करोड; अनुमानित
0 भाटापारा में उत्पादन 275 करोड; अनुमानित
0 तिल्दा में 125 करोड; रु.का अनुमानित बाजार
0 प्रदेश में 3000 करोड; का नकली बाजार
0 यहां से ओडिशा भी खपाया जा रहा नकली उत्पाद
0 ओडिशा में 12 से 15 सौ करोड; अनुमानित बाजार

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संचार माध्यमो के लिए तरस रहे इलाके
बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों को अन्य इलाकों से जोड;ने के लिए ळझश ने टावर लगाने की कवायद एक बार फिर तेज कर दी है... केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने भी 4 महीनों के भीतर इन इलाकों में नेटवर्क व्यवस्था दुरुस्त करने की बात की थी...हालांकि इन क्षेत्रों में कई टावर लगाए तो गए... लेकिन इन टावरों में अब नेटवर्क का संचालन ही शुरू नहीं किया जा सका।
बस्तर के दूरस्थ नक्सल प्रभावित इलाकों को मोबाइल के जरिए बाहरी दुनिया से जोड;ने की कवायद को लगातार धक्का लग रहा है..यहां नक्सली सड;क निर्माण के साथ मोबाइल नेटवर्क का भी विरोध करते हैं..कई बार मोबाइल टॉवर्स को निशाना भी बनाया गया..केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इस इलाके के लिए मोबाइल नेटवर्क को जरूरी मानते हुए पूरे बस्तर संभाग में टॉवर लगाने की बात कही थी और इस काम की निगरानी केन्द्र सरकार द्वारा करने की बात कही थी...इसके तहत कई टॉवर लगाए तो गए लेकिन इनमें अभी नेटवर्क नहीं मिल रहा है..फिलहाल बस्तर संभाग में लगाए जाने वाले 76 से अधिक मोबाइल टावर्स का सर्वे करने के बाद, काम शुरू किया जा चुके हैं..जिसे लेफ्ट विंग एक्ट्रिमिस्ट अनुदान योजना के तहत लगाया जा रहा।सरकार ने नक्सली वारदातों को देखते हुए इन टावरों को थानों के नजदीक या थानों के अंदर लगाने की योजना बनाई है..निश्चित रूप से इन मोबाइल टॉवरों के लगने से दुर्गम इलाकों में भी मोबाइल से बातचीत हो जाएगी । इससे शासन-प्रशासन भी ग्रामीणों के नजदीक पहुच सकेगा ।
सोने के अवैध कारोबार में फंसे 70 फीसदी सराफा व्यवसायी
 

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