Friday, April 2, 2010

रायपुर आसान टारगेट

राजधानी के बाजार में घूम रहे कराड़ों के नकली नोट
रायपुर। क्या... आप बैंक जा रहे हैं, पैसा निकालना है... सावधान रहिएगा, अच्छी तरह देख लीजिएगा, आजकल बैंकों से भी नकली नोट मिल जाते हैं। राजधानी में लोग अब अक्सर इस तरह के मशविरे रिश्तेदारों या पड़ोसियों को देने लगे हैं, और दें भी क्यों नहीं, हद तो हो ही चुकी है। खुफिया पुलिस की सूचनाओं को पुख्ता मानें तो अकेले राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में करोड़ों के नकली नोट हर साल खपाए जा रहे हैं। रेलवे के हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग पर होने और बड़ा बाजार होने के चलते रायपुर को नोट खपाने वाले आसान टारगेट के रूप में मानते हैं। पड़ोसी बांग्लादेश में छापी जा रही नकली भारतीय मुद्रा(नोट) वेस्ट बंगाल के रास्ते से बड़े पैमाने पर छत्तीसगढ़ में खपाए जाने से पुलिस हलाकान है। खुफिया विभाग के अफसर भी मानते हैं कि राज्य में नकली नोटों की तस्करी बंगाल से हो रही है। छह माह पूर्व रेलवे स्टेशन स्थित एक होटल में छापा मारकर अंतर्राराष्ट्रीय स्तर के दो लाख नौ हजार के नकली नोट राजधानी पुलिस ने बरामद किया था। मामले में बंगाल के बोरजहांन शेख को देवेन्द्रनगर इलाके में नोट खपाते पकड़ा गया था,हालांकि प्रमुख सरगना असमाउल शेख मौका पाकर फरार हो गया था। उसे पकड़ने कई बार पुलिस टीम बंगाल के मालादा क्षेत्र में गई थी लेकिन सफलता नहीं मिली। असमाउल के तार बंग्लादेश में सक्रिय पाक के आईएसआई एजेंटों से जुड़े होने की आशंका से केन्द्रीय व राज्य सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ी हुई है। यही वजह है कि असमाउल को पकड़ने बंगाल पुलिस लंबे समय से ताक में बैठी है। सूत्रों का दावा है कि असमाउल फिलहाल बंग्लादेश में छुपा हुआ है। जाली नोटों के सौदागरों की छत्तीसगढ़ पर लगातार नजर बनी हुई है। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में बाहरी प्रांतों के सौदागर धड़ल्ले से नकली नोट खपाए जा रहे है। अच्छी गुणवत्ता और उत्कृष्ट छपाई के होने के कारण इन नकली नोटों की पहचान कर पाना आम आदमी के बस की बात नहीं है। बाहरी तस्करों के आलावा स्थानीय स्तर पर भी स्केनर,प्रिंटर और फोटो कापी मशीन से छापे गए नोट खपाने के आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। शार्टकट में मालदार बनने के चक्कर में स्केनर और प्रिंटर की मदद से हजार, पांच सौ और सौ-सौ के नोट साधारण फोटो कापी मशीन के जरिए छापकर अपराधी बाजार में इसे खपाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया है। ऐसे कई मामले पुलिस ने पकड़े हैं। पिछले कुछ सालों में राजधानी रायपुर सहित सरगुजा, जशपुर, कोरिया, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बिलासपुर, धमतरी, बस्तर, दंतेवाड़ा,महासंमुद, भिलाई-दुर्ग सहित अन्य जिलों में लाखों के नकली नोट पकड़े गए हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में इनकी छपाई लोकल स्तर का होना पाया गया है।

रिजर्व बैंक ने लिखा था डीजी को पत्र

दो साल पहले रिजर्व बैंक ने डीजीपी को पत्र लिखकर आगाह किया था कि आपके छोटे राज्य के बैंकों में नकली नोट चलने की शिकायतें ज्यादा आ रही है। राज्य की सीआईडी ने जांच रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख करते हुए कहा था कि जितने नकली नोट के मामले पकड़े गए है वह इसी प्रदेश में बना पाया गया। अशिक्षा के कारण आम लोग इसकी पहचान नहीं कर पा रहे हैं। नकली नोट ज्यादातर पेट्रोल पंपों में खपाये जाते रहे हैं। एक साल पहले राजनांदगांव में क्राइम ब्रांच ने नकली नोट खपाने वाले एक गिरोह को पकड़ा था। इसके बाद से प्रदेश में दो दर्जन से अधिक छिटपुट मामले सामने चुके है।

ये हैं प्रमुख मामले

-नकली नोट खपाते 4 सितम्बर 09 को आकाशवाणी कालोनी निवासी संतोष ठाकरे और महेश निर्मलकर न्यू मंडी गेट पंडरीतराई क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े थे। युवकों के कब्जे से स्केनर, प्रिंटर, कम्प्यूटर, सीपीयू सहित पांच सौ के सात नकली व एक असली नोट जब्त किए गए थे।

-पलारी थाना क्षेत्र के गिधपुरी चौकी अंतर्गत बिदराडीह गांव में 20 सितम्बर 09 की शाम हजार रुपए के दस जाली नोटों के साथ ग्राम तमोरी निवासी कामता प्रसाद सतनामी पकड़ा गया था।

- मौदहापारा क्षेत्र में 13 अक्टूबर 09 को छह लाख के जाली नोट अदला-बदली करने के प्रयास में लगे महासमुंद जिले के संजय भोई को पुलिस ने पकड़ा था। जबकि मुख्य सरगना राजिम क्षेत्र के ग्राम अतरमरा निवासी बर्खास्त शिक्षक जोहरराम यादव अब तक पकड़ा नही जा सका।

थम नहीं रहा सिलसिला

खुले बाजार में ही नहीं राजधानी समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के बैंकों में भी नकली नोट मिलने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। अकेले राजधानी में करीब दो दर्जन मामले सामने आए हैं जिसमें खातेदार द्वारा जमा कराए गए हजारों के नकली नोटों की पहचान व रिर्जव बैंक की पुष्टि के बाद प्रबंधन की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध तो दर्ज कर लिया लेकिन अब तक एक भी मामले में असली आरोपी तक पुलिस के हाथ नही पहुंच पाए हैं।

नकली नोट की पहचान

कुछ समय से बहुत से बड़े राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों के एटीएम से जाली नोट निकलने की घटनाएं सामने आई हैं। जाली नोटों के प्रसार को रोकने के लिए आरबीआई ने सभी नोटों पर कुछ चिन्ह और संकेत दिए हैं। कुछ ऐसे टिप्स हैं, जिनसे असली करंसी नोट की पहचान आसानी से किया जा सकता हैं। इसके साथ ही नोट के असली होने के ज्यादातर संकेत और चिन्ह नोट के सामने की ओर (नोट की वह साइड जिसके केंद्र में मूल्य छपा होता है) देखकर किया जा सकता हैं।

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