Sunday, October 27, 2013

हिंसक चुनावी इतिहास-
पहले चरण की 18 सीटें ब डी चुनौती  
छत्तीसग ढ में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। इसमें बस्तर संभाग की सभी 12 सीटों के साथ राजनांदगांव जिले की 6 सीटें शामिल हैं।  छत्तीसग ढ का चुनावी इतिहास गवाह है कि इन सीटांे पर शांतिपूर्ण मतदान कराना सबसे ब डी चुनौती है। छत्तीसग ढ राज्य स्थापना के 13 वर्षों में यहां अब तक चार ब डे चुनाव हुए हैं। इसमें 2003 और 2008 में विधानसभा चुनाव के साथ 2004 व 2009 का लोकसभा चुनाव शामिल हैं। इसके साथ ही 2011 में बस्तर में लोकसभा के लिए हुआ उपचुनाव भी शालिम हैं। इन चुनाव में करीब 20 जवानों ने अपनी शहादत दी है। इसमें सबसे ज्यादा हिंसा 2003 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में हुई। हालांकि मुठभे ड कम हुए, लेकिन 73 स्थानों पर नक्सलियों ने ईवीएम लूट लिया। इनमें छह जवान शहीद हो गए थे।
पुलिस अफसरों के अनुसार नवंबर 2008 में संपन्न् विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान बीजापुर में वायु सेना के हेलिकॉप्टर पर गोलीबारी की वारदात के अलावा कोई ब डी घटना नहीं हुई। केवल दो दर्जन स्थानों पर ईवीएम लूटे गए, लेकिन इसके बाद हुए पुनमर्तदान में पुलिस को ज्यादा नुकसान उठाना प डा। विस्फोट में नक्सलियों ने एक ही स्थान पर सात जवानों को उ डा दिया। पूरे चुनाव के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षाबलों का नक्सलियों से सामना हुआ। इस दौरान तीन नक्सलियों के शव बरामद किए गए। अफसरों के अनुसार 2008 विधानसभा मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या छह से भी अधिक हो सकती है।
बस्तर में पहला लोकसभा चुनाव
राज्य स्थापना के बाद 2004 में पहली बार हुए लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सली क्षेत्रों में ब डे पैमाने पर वारदातें हुईं। नक्सलियों ने लगभग 55 स्थानों पर ईवीएम लूटा। इस दौरान मतदान दलों और सुरक्षाबलों को रोकने के लिए 34 स्थानों पर विस्फोट भी किया। लगभग दो दर्जन स्थानों पर पुलिस और नक्सलियों का आमना-सामना हुआ। इसमें दो पुलिस कर्मी शहीद हुए तथा करीब 24 घालय हुए। सुरक्षाबलों ने भी कई नक्सलियों को मार गिराया, लेकिन शव केवल एक ही बरामद हो पाई।
2008 में हेलिकॉप्टर पर गोलीबारी
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बीजापुर के पीडिया में मतदान दल  को लेने गए एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर पर उ डान भरने से पहले ही नक्सलियों ने गोली चला दी। घटना में हेलिकॉप्टर सहायक पॉयलट की मौत हो गई। हेलिकाप्टर पर भी गोली लगी है। इसके बावजूद पॉयलट मतदान दल को सुरक्षित निकालने में सफल रहा। क्षतिग्र स्त हेलिकाप्टर को आपात स्थिति में जगदलपुर में उतारा गया है।
2009 लोकसभा चुनाव की कुछ प्रमुख घटनाएं
0 राजजनांदगांव में कमकासुर में विस्फोट में पीठासीन अधिकारी सहित पांच की मौत।
0 बस्तर में आध्ाा दर्जन स्थनों परमुठभे ड।
0 नक्सली हमलों में दो जवान शहीद हुए और आधा दर्जन घायल।
0 दंतेवा डा के जंगमपाल, भतपाल, कलेपाल, नीलावाया, बडेगादम व हांदावाडा ईवीएम लूटे गए।
0 नारायणपुर में मुठभे ड के दौरान सीआरपीएफ के दो जवान शहीद।
0 नारायणपुर के  पदेली, खरपेडी, कोरमेल, मुतनपाल, गुरगुम, हसननार, पुशपाल में भी ईवीएम लूटे गए।
0 पीडेमेटा व मानपुर में नक्सलियों ने मतदान दल को बंधक बनाकर ईवीएम मशीन जला दिया।
संगीन के बिना सुरक्षा संभव नहीं
बस्तर संभाग और राजनांदगंाव के अंदस्र्नी इलाकों में हथियारबंद जवानों के पहरे के बिना शांतिपूर्ण मतदान संभव नहीं है। यही वजह है कि राज्य स्थापना के बाद से हर चुनाव में सुरक्षा में तैनात की जाने वाली फोर्स की संख्या लगातार ब ढाई जा रह ीहै। अफसरों के अनुसार 2004 के लोकसभा चुनाव में केन्द्रीय फोर्स की 125 कंपनी तैनात की गई थी, जबकि 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान 550 कंपनियां यहां तैनात की गईं। इनमें बीएसएफ, एसएसपी और आईटीबीपी जैसी फोर्स को बस्तर सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्र्प से तैनात किया गया था।
चुनावी हिंसा आंक डों में-
घटनाएं        विस. 2003    लोस. 2004    विस. 2008      
ईवीएम लूट-    73    55        23  
मुठभे ड-        12    24        48      
विस्फोट    -    15    34        16
शहीद-        06    02        09
घायल-        10    24        18
मारे गए नसली    00    01        03
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पहले चरण में इन सीटों पर होगा मतदान- कांकेर, केशकाल, कोण्डागांव, नारायणपुर, बस्तर, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवा डा, बीजापुर, कोंटा, खैराग ढ, डोंगरग ढ, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, मोहला-मानपुर, अंताग ढ और भानुप्रतापपुर।
हाईलाइट
-18 सीटों पर होगा मतादन
- 4074 मतादन केन्द्र बना गए
- सुरक्षा कारणों से सुबह 7 से 3 बजे तक होगा मतदान
- सभी केन्द्र संवेदनशील और अतिसंवेदनशील की श्रेणी में।
चुनाव कार्यक्र म                पहला चरण्ा                      
अधिसूचना व नामांकन-    18 अक्टूबर   
नामांकन अंतिम  तिथि-    25 अक्टूबर   
नामांकन पत्र स्क्र ूटनी-      26 अक्टूबर    
नाम वापसी-                 28 अक्टूबर    
मतदान तिथि-               11 नवंबर      
मतगणना-                  08 दिसंबर
18 सीटों पर आयोग के लिए चुनौती
- नक्सली और अधिकांश मतदान केन्द्र के रास्ते में  बिछे उनके लैंडमाइंस, सबसे ब डी चुनौती हैं।
- अंदस्र्नी इलाकों तक मतादन दलों को सुरक्षित पहुंचाना और फिर वहां से बाहर लाना।
- ऊंचे पे ड और पहा ड पर एके 47 से लैश नक्सलियों से हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा।
- बाहर से आई फोर्स के लिए घने जंगल और पहुंच विहिन इलके चुनौती साबित हो सकते हैं।

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ैपहले चरण के चुनाव में सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त फोर्स राज्य को उपलब्ध कराया गया है। आयोग राज्य में स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराने हर संभव कोशिश करेगा।
सुनील कुमार कुजूर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी
राज्य की जनता नक्सलियों के इरादों को अच्छी तरह समझ चुकी है। जनता के जरिए उनकी हरकतों की लगातार सूचनाएं मिल रही हैं। हमें पूरा विश्वास है कि जनता के सहयोग से राज्य में पूरी तरह शांतिपूर्ण मतादान कराया जाएगा।
रामनिवास
डीजीपी,
 राजधानी में छोटी-छोटी बातों पर चाकू-छूरा चल रहे हैं। चाकू चलाने वालों में किशोर और युवा की संख्या अधिक है। पुलिस रिकॉर्ड बता रहा है कि डेढ़ माह में 22 लोगों पर चाकू-छूरा से हमला हुआ है, जिनमें तीन लोगों की मौत हुई है। चाकूबाजी की बढ़ती वारदातों ने राजधानी पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गुंडे-बदमाशों पर खाकी का खौफ नजर नहीं आ रहा, तभी तो खाकी वर्दी वालों पर भी चाकू चला रहे हैं। शहर में हर दूसरे दिन चाकूबाजी की घटना हो रही है। इससे आम लोग दहशत में हैं। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लगता है कि राजधानी के युवा जेब में चाकू-छूरा लेकर घूम रहे हैं।
8 माह, 17 हत्या, 31 प्रयास
राजधानी का आठ माह का रिकॉर्ड देखा जाए तो शहर के 18 थाना क्षेत्र में 17 हत्याएं और 31 हत्या के प्रयास की वारदातें हो चुकी हैं। इन आकड़ों में सितंबर और अक्टूबर की घटनाएं शामिल नहीं हैं। अगर दोनों माह की घटनाओं को शामिल किया जाए, तो शहर में 100 से अधिक चाकूबाजी की घटना हो चुकी है। सबसे ज्यादा मामले सिविल लाइन थाने में दर्ज हैं।
  बेखौफ हुए अपराधी
अपराधी और आवारागर्दी करने वाले बेखौफ घूम रहे हैं, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। शंकर नगर निवासी प्रतिमा यादव बताती हैं कि वे रोज देवेंद्र नगर एक संस्थान में काम करने रिक्शे से आना-जाना करती हैं। पहले रिक्शा वालों से मोल भाव कर लेती थीं लेकिन अब बढ़ती घटनाओं से डरकर मोलभाव करना ही छोड़ दिया है।
पुलिस पर हमला
कोतवाली इलाके में 26 सितंबर को एक निगरानी बदमाश को पकड़ने गए पुलिस वालों पर ही बदमाशों ने हमला कर दिया, जबकि दोनों सिपाही वर्दी में थे। एक सिपाही के कान और हाथ में चोट आई थी और दूसरे के हाथ में। यह हमला दर्शाता है कि अपराधी तत्व कितने बेखौफ हैं।

 खुद को झुकता नहीं देख सकते युवा
वर्तमान जो परिवेश है, उसमें युवा किसी के आगे झुकना नहीं चाहते। खासतौर पर लड़ाई-झगड़े में वह सामने वाले से आगे रहना चाहता है। हर कोई अपने आप को सामने वाले से ज्याद शक्तिशाली मानता है। इसी चक्कर में अपराधी तत्व चाकू-छूरा चलाते हैं। उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात रहती है कि वह सामने वाले से ज्यादा शक्तिशाली है। बाद में क्या होगा, वे नहीं सोचते, लेकिन बाद में अफसोस होता है। वर्तमान में युवाओं में सहनशीलता नहीं है। वे बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते हैं।
- डॉ. मनोज साहू, मनोचिकित्सक
पुलिस का खौफ कायम है
पुलिस का खौफ अपराधियों पर आज भ्ाी कायम है। अपराधियों पर नियंत्रण रखने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जब भी शहर में चाकूबाजी की घटना हुई है, पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया है। घटना में उपयोग हथियार के स्वरूप अलग-अलग हैं। पुलिस आज भी सख्त कार्रवाई कर रही है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी।
पंकज चंद्रा, एएसपी सिटी

केस-1
2 सितम्ब्ार- अम्बेडकर अस्पताल में मध्यप्रदेश से आए विक्की मसीह  ने अपनी प्रेमिका अलवर्ड उर्फ बुलबुल को चाकू मार दिया था। फिर खुद ने भी जान देने की कोशिश की थी।
केस-2
8 सितम्ब्ार- तेलीबांधा मरीन ड्राइव टहलने गए  फैजल खान, नफीस मेमन, अंकित जयसवाल और शुभम कुमार, इजुल पर शंकर नगर इलाके के आधा दर्जन युवकों ने चाकू से हमला कर दिया था। पुलिस ने छह दिन के भीतर शंकर नगर के सात युवकों को गिरफ्तार किया, अभी दो आरोपी फरार हैं।
केस-3
10 सितम्बर- चंगोराभाठा  में 22 वर्षीय एक युवती के घर घुसकर योगेंद्र सिंह ठाकुर और उसके साथियों ने उस पर हमला कर दिया था। आरोपी आज तक पुलिस पकड़ से बाहर हैं।
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केस-4
11 सितंबर - मामूली विवाद पर मंदिर हसौद आरआईटी कॉलेज के सामने बीई तीसरे वषर््ा के छात्र सौरभ शांडिल्य और शेखर तिवारी पर प्रिंस जयसवाल, अभिमन्यू और शुभम ने चाकू से हमला कर दिया था। घटना के 20 दिन बाद भी एक आरोपी को पुलिस नहीं पकड़ पाई है।
केस-5
12 सितंबर- पुरानी बस्ती में मो. सैयद कादरी के घर घुसकर नवाब खान और उसके बेटा आसिफ खान ने चाकू से तबाड़तोड़ हमला कर दिया था। पुलिस इस मामले में भी एक आरोपी को पकड़ नहीं  पाई है।
केस-6
20 सितंबर - भनपुरी में गणेश विसर्जन के दौरान आकाश सिंह पर  मोहल्ले के चित्रेश केकडे, राकेश कौशिक , जग्गा उर्फ जागेश्वर चंद्राकर, नागेश्वर दास, भरत वर्मा ने चाकू से हमला कर दिया था। डंडे से भी उसकी पिटाई की थी।
केस-7
21 सितम्बर - हीरापुर में दो भाइयों को निगरानी बदमाश जमील खान और  उसके भाई बाबू खान ने सरेराह चाकू मार दिया था। आरोपी जबरदस्ती युवकों से उलझे थे।
केस-8
24 सितंबर- टिकरापारा सुदामानगर निवासी रूपचंद शेख के सिर और हाथ पर मोहल्ले के एक 13 वर्षीय बालक ने ब्लेड मार दी थी। रूपचंद ने उस बालक को अपने घर के बाहर गाली-गलौच करने से मना किया था।
केस-9
25 सितम्बर- शक्तिनगर निवासी 15 वर्षीय आकाश कुमार पर तस्र्ण नगर के दो किशोरों ने आरीनुमा ब्लेड से हमला कर दिया था। अस्पताल ले जाते समय आकाश की सांस थम गई। विवाद छींटाकशी को लेकर था।
केस-10
26 सितम्बर- कोतवाली इलाके में  दो पुलिस कर्मियों अभिषेक बंजारे और निर्मलकर के ऊपर मो. मोसीन खान और उसके पिता  मो. वकील खान ने चाकू से हमला कर दिया। पुलिस कर्मी को लहूलुहान करके मो. वकील भाग गया।
केस-11
3 अक्टूबर- आश्रम तिराहा के पास घर लौट रहे एक फेरीवाले पर पॉकेटमार ने चाकू से हमला कर दिया।
केस-12
14 अक्टूबर- दुर्गा विसर्जन के दौरान डीजे पर डांस करते समय लाखेनगर चौक पर पार्षद और उसके साथियों ने दो लोगों को गुप्ती मार दी।
केस-13
14 अक्टूबर- टिकरापारा में घर के सामने से बाइक नहीं हटाने पर हिस्ट्रीशीटर गौतम बंगाली ने युवक को गुप्ती मार दी।
केस-14
15 अक्टूबर- आश्रम तिराहा के सामने ऑटो सवार दो युवकों ने एक अधेड़ को चाकू मार दिया और उसकी जेब से मोबाइल, पैसे निकालकर भाग गए।
केस-15
17 अक्टूबर- श्याम नगर में मामूली विवाद पर एक बदमाश ने युवक पर चाकू ताबड़तोड़ तीन वार कर फरार हो गया। शंकरनगर में आईस्क्रीम शॉप संचालक को गुप्ती लेकर दौड़ाया।
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राजधानी में एमसीएक्स के कई बड़े कारोबारी
0 पुराने फरार, अब दूसरे चला रहे गोरखधंधा
0 पुलिस के पास सूचनाएं, लेकिन कार्रवाई नहीं
रायपुर(निप्र)। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के दो बड़े कारोबारी अंडरग्राउंड हैं, इसके बावजूद यहां करोड़ों का कारोबार हो रहा है। दरअसल, अब भी यहां कई बड़े कारोबारी हैं, जो इस गोरखधंधे को चला रहे हैं। पुलिस के पास सूचनाएं तो हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही है। बल्कि, बार-बार जांच का जिम्मा बदलकर कार्रवाई को उलझाया जा रहा है।
एमसीएक्स के बाजार में मन्न्ू नत्थानी और नितिन चोपड़ा बड़ा नाम है। लेकिन अब इस काले कारोबार में कुछ और बड़े नाम जुड़ गए हैं। जानकारी के मुताबिक एमसीएक्स में जिस एक बड़े कारोबारी का नाम इन दिनों चल रहा है, वह पेशे से खुद को बिल्डर बताता है। इसका पूरा चेन काम कर रहा है। इसके अलावा फरार कारोबारियों ने अपने धंधे को संभालने के लिए पार्टनरशिप कर ली है। इस तरह पार्टनरशिप में जुड़ने वालों का भी एमसीएक्स में नया नाम जुड़ा है। पुलिस को एमसीएक्स के नए कारोबारियों की जानकारी है। लेकिन न तो उनकी सूची तैयार की गई है और न ही उनके धंधे पर नजर रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार इसी कारण फरार एमसीएक्स कारोबारियों के पार्टनर्स ने सदरबाजार में अपना कार्यालय भी खोल लिया है।
आईजी सीआईडी का सुपरविजन क्यों नहीं?
डीजी रामनिवास ने एमसीएक्स की जांच सीआईडी को सौंप दी है। सीआईडी के दो एसआई जांच में लगाए गए हैं। यह जांच आईजी सीआईडी हिमांशु गुप्ता के सुपरविजन में नहीं बल्कि, आईजी (नक्सल) एसआरपी कल्लूरी के सुपरविजन में होगी।
हर बार नए सिरे से जांच
एमसीएक्स के जिन दो मामलों की जांच सीआईडी कर रही है, उनकी एफआईआर नवंबर 2011 में हुई थी। पहले विशेष अनुसंधान सेल ने जांच की। उसकी रिपोर्ट पर ही एफआईआर हुई। इसके बाद सिविल लाइन की पूर्व सीएसपी मनीषा ठाकुर को जांच अधिकारी बना दिया गया। उन्होंने नए सिरे से जांच की बात कहकर शिकायतकर्ताओं का केवल बयान लिया। इसके बाद की जांच आगे नहीं बढ़ी। सीएसपी का तबादला हुआ तो सीआईडी को फाइल सौंप दी गई। अब सीआईडी फिर से नए सिरे से जांच कर रही है। शिकायतकर्ताओं को नोटिस देकर बुलाया जा रहा है। उनका बयान लिया जाएगा। तब, जांच आगे बढ़ेगी।
एफआईआर, झुठलाई तो नहीं जाएगी?
सूत्रों से पता चला है कि विशेष अनुसंधान सेल के जिन अधिकारियों ने एमसीएक्स की जांच की थी, उन्हें पुलिस मुख्यालय बुलाया गया था। अनुसंधान सेल की जांच और एफआईआर को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी ने सवाल उठाए। पुलिस के इस रवैये पर सवाल यह उठता है कि कहीं बार-बार जांच का जिम्मा बदलकर कार्रवाई को उलझाने या लम्बा खींचने या अपनी ही एफआईआर को झुठलाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।
अब जांच का अटकना तय
एमसीएक्स की जांच का अब अटकना तय हो गया है, क्योंकि अभी पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों का फोकस विधानसभा चुनाव है। अभी केवल शिकायतकर्ताओं का बयान दर्ज हो जाए, वही बड़ी बात है। नईदुनिया ने मंगलवार को आईजी (नक्सल) से इस संदर्भ में बात की, तो उन्होंने भी चुनाव में व्यस्तता की बात कही।
अब जिला पुलिस को मतलब नहीं
(नईदुनिया ने आईजी रायपुर रेंज से एमसीएक्स की जांच और नए कारोबारियों पर जांच को लेकर चर्चा की, तो उनका कहना था)
एमसीएक्स की फाइल सीआईडी को सौंप दी गई है। सीआईडी ही हर बिंदु पर जांच करेगी। अगर, कहीं सीआईडी जिला पुलिस से मदद चाहेगी, तो वह दी जाएगी।
जीपी सिंह, आईजी

आखिर एमसीएक्स की जांच का जिम्मा बार-बार बदला क्यों जा रहा है?
0 पहले विशेष अनुसंधान सेल से जांच कराई गई
0 फिर सीएसपी सिविल लाइन को सौंपी फाइल
0 अब जांच सीआईडी को और सुपरविजन आईजी (नक्सल) के हवाले
केस-1
सिविल लाइन थाना में गीतांजलिनगर निवासी विमल जैन ने एमसीएक्स कारोबारी विनीत स्टेट शंकरनगर निवासी नितिन चोपड़ा व चार-पांच अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। उनका आरोप है कि आरोपियों ने घर में घुसकर विमल जैन को धमकाया था कि तुम्हारा बेटा विपुल जैन उनके कब्जे में है। वह 26 लाख स्र्पए एमसीएक्स में हार गया है। इसके बाद कोरे स्टाम्प पेपर में दस्तखत करा लिए थे।
केस-2
कोतवाली में सूर्या अपार्टमेंट पचपेड़ी नाका निवासी अभय नाहर ने एमसीएक्स कारोबारी मन्न्ू नत्थानी, सिम्मी नायडू, जीत्तू कोचर, अनीस भंडारी के खिलाफ एफआईआर कराई थी। उसने 50 लाख स्र्पए एमसीएक्स में लगाए थे, जिस पर देनदारी निकाल दी थी। जमीन बेचकर अभय ने रकम चुकाई थी। बाकी रकम वसूलने के लिए उसका अपहरण कर मारपीट की गई थी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) की जांच का जिम्मा बार-बार बदला क्यों जा रहा है? यह बड़ा सवाल है। दो साल पुरानी एफआईआर की जांच सबसे पहले विशेष अनुसंधान सेल से कराई गई थी। उसके बाद यह मामला पूर्व सीएसपी सिविल लाइन मनीषा ठाकुर को सौंप दिया गया। अब जांच सीआईडी को और सुपरवजिन आईजी (नक्सल) एसआरपी कल्लूरी के हवाले कर दी गई है। इतने जांच अधिकारी बदलने के बाद भी पुलिस एमसीएक्स के फरार आरोपियों को पकड़ सकी है और न ही किसी नतीजे पर पहुंच पाई है।
एमसीएक्स कारोबारियों के खिलाफ दो साल पहले शिकायत हुई थी। तब तत्कालीन एसपी ने इन मामलों की जांच विशेष अनुसंधान सेल को सौंपी। सेल ने जांच में शिकायत को सही पाया। तब सेल की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर, 2011 में सिविल लाइन थाना और कोतवाली में नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर कर दी गई, जिसमें से पांच लोग नामजद आरोपी थे। सिविल लाइन थाने में दर्ज मामले में एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है, जबकि कोतवाली पुलिस ने मन्न्ू नत्थानी को छोड़ बाकी को गिरफ्तार कर लिया था। क्योंकि मन्न्ू और नितिन चोपड़ा बड़े एमसीएक्स कारोबारी हैं, इस कारण पुलिस ने दोनों पर दस-दस हजार स्र्पए इनाम की घोषणा भी की। इसके बाद भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका। वरिष्ठ अधिकारियों ने सिविल लाइन थाने के आरोपियों को पकड़ने की जिम्मेदारी उस समय की सीएसपी सिविल लाइन मनीषा ठाकुर को दी। सीएसपी ने एमसीएक्स के आरोपियों को पकड़ने में दिलचस्पी ही नहीं ली। सूत्रों से पता चला है कि उनके तबादले के पहले आईजी जीपी सिंह ने उन्हें एमसीएक्स के आरोपियों को पकड़ने के लिए सख्ती से निर्देश दिए थे, लेकिन दो-चार दिन बाद ही सीएसपी का तबादला आदेश जारी हो गया। इसके बाद डीजी रामनिवास ने खुद एमसीएक्स की केस फाइल पुलिस मुख्यालय बुला ली। उन्होंने फाइल सीआईडी को सौंप दी है।
आईजी (नक्सल) को देंगे पूरी रिपोर्ट
अब एमसीएक्स प्रकरणों की जांच आईजी नक्सल ऑपरेशन एसआरपी कल्लूरी के सुपरविजन में होगी। जांच टीम में सीआईडी के एसआई एस भोई और बीएस बघेल को रखा गया है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आईजी के मार्गदर्शन में जांच करेंगे और पूरी रिपोर्ट आईजी को देंगे।
नोटिस देकर तलब किया
सीआईडी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता विमल जैल के बेटे विपुल, सात गवाह और आरोपी पक्ष के लोगों को नोटिस दी है। उन्हें इसी हफ्ते के अंत में पूछताछ के लिए तलब किया गया है। इसके अलावा सीआईडी के अधिकारियों ने विशेष अनुसंधान सेल के जांच अधिकारी से भी प्रकरण के संदर्भ में चर्चा की है।
रिपोर्ट वापस लेने मिल रही धमकी
जैन परिवार को रिपोर्ट वापस लेने की धमकी मिल रही है। इसी साल 24 अगस्त को विपुल जैन ने सिविल लाइन थाने में मन्न्ू नत्थानी और नितिन चोपड़ा के खिलाफ एक और एफआईआर की है। विपुल के मुताबिक उसे दो साल पुरानी रिपोर्ट को वापस लेने के लिए पिछले पांच-छह माह से धमकाया जा रहा है।
वर्सन--
अभी चुनाव में व्यस्त हूं
एमसीएक्स की जांच के बारे में अभी कुछ नहीं बता पाऊंगा। मैं चुनाव में व्यस्त हूं।
एसआरपी कल्लूरी, आईजी, नक्सल ऑपरेशन

 

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